राम मंदिर निर्माण की ताज़ा ख़बर – Ram Mandir Nirman Latest Update Today

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Ram Mandir Nirman news 2020

12th August 2020 :- रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बुधवार को एक वीडियो जारी किया. उन्होंने कहा कि 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर का भूमि पूजन किया था, अब मंदिर का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है. चंपत राय के मुताबिक, करोड़ों राम भक्त मंदिर निर्माण में योगदान देना चाहते हैं जिसके बाद अब ट्रस्ट की ओर से दान करने की सभी जानकारी दी जा रही है.

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श्री रामजन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट की ओर से ट्वीट में लिखा गया, ‘जय श्री राम! प्रभु श्रीराम की पावन जन्मभूमि पर उनके भव्य और दिव्य मन्दिर के निर्माण का कार्य माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा भूमिपूजन पश्चात प्रारम्भ हो गया है. श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र सभी श्रीराम भक्तों का आह्वान करता है कि मन्दिर निर्माण हेतु यथाशक्ति व यथासंभव दान करें.’

9th August 2020 :- 5 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भव्य भूमि पूजन किया गया। अब राम मंदिर का प्रसाद लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। इसके लिए तैयारियां जोरशोर से की जा रही हैं।  जानकारी के मुताबिक ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय दिल्ली जाकर सभी शीर्ष लोगों को खुद प्रसाद देंगे। इसमें सबसे पहले प्रधानमंत्री मोदी को प्रसाद देने के साथ-साथ कार्यक्रम में शामिल होने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया जाएगा। बताते चलें कि 5 अगस्त को ही भूमि पूजन के बाद पीएम मोदी को प्रसाद दिया गया था, लेकिन एक बार फिर से पीएमओ के तमाम अधिकारियों के लिए खास प्रसाद पैकेट तैयार कराया गया है, जिसे ट्रस्ट के महासचिव खुद पहुंचाएंगे। इसके साथ ही पीएम मोदी को धन्यवाद ज्ञापित करेंगे। सूत्रों की मानें तो प्रधानमंत्री मोदी के साथ-साथ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत गृहमंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह और देश के तमाम दिग्गज नेताओ के पास भी भूमिपूजन का प्रसाद पहुंचाया जाएगा। भव्य भूमिपूजन की तरह से प्रसाद भी बेहद खास है, जिसमें न सिर्फ लड्डू हैं, बल्कि राम मंदिर से जुड़ी हुई तमाम और भी वस्तुएं हैं।

8th August 2020 :- अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन संपन्न होने के बाद श्रीरामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने मंदिर के लिए जिस उच्च तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा…उससे ये मंदिर 1000 साल तक आंधी तूफान सहने के बाद भी पूरी तरह सुरक्षित होगा…उन्होंने कहा कि राम मंदिर के खंभों में लोहे का प्रयोग नहीं किया जाएगा..आगे चंपत राय ने कहा कि कुल 70 एकड़ जमीन को ध्यान में रखकर नक्शा पास कराया जाएगा…और यह बाद में तय होगा कि कौन स्ट्रक्चर कहां बनाया जाएगा…इस दौरान उन्होंने ये भी साफ कर दिया कि जब उन्होंने ट्रस्ट की जिम्मेदारी संभाली थी तब 12 करोड रुपए थे और अभी करीब 30 करोड रुपए चंदे के रूप में आए हैं…ram mandir nirman news

Ram Mandir Nirman Latest Highlights

7th August 2020 :- थरूर का PM मोदी पर निशाना, ‘CAA, NRC के बाद अयोध्या में 8 करोड़ लोगों को भूल जाना चिंता का विषय’

रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को अयोध्या में राम मंदिर का शिलान्यास करते हुए कहा था कि कई पीढ़ियों ने दशकों तक राम मंदिर निर्माण के लिए संघर्ष किया.उन्होंने कहा, ‘‘मैं देश के 130 करोड़ लोगों की ओर से उनके उस बलिदान के लिए उन्हें नमन करता हूं , जिससे राम मंदिर की नींव रखने का मार्ग प्रशस्त हुआ.’’

6th August 2020 :- गौरतलब है कि कमलनाथ ने राम मंदिर के लिए भूमि पूजन का स्वागत करते हुए बुधवार को कहा था कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने राम मंदिर का ताला खुलवाया था और बहुत समय से हर भारतवासी की आकांक्षा थी कि राम मंदिर का निर्माण हो. कमलनाथ ने भोपाल में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यालय के मुख्यद्वार पर भगवान श्रीराम की तस्वीर के सामने दीप प्रज्वलित कर दीपोत्सव की शुरुआत की और आरती कर भगवान राम का पूजन भी किया.

6th August 2020 :- लेपा गांव के राम मंदिर की डिजाइन भी अयोध्या के मंदिर की तरह ही बनवाई गई है. इस अवसर पर अरूण यादव ने बताया, ”यह ऐतिहासिक क्षण है कि अयोध्या में भी राम मंदिर का भूमि पूजन हुआ है. सभी के सहयोग से भव्य राम मंदिर का निर्माण होगा. लेना गांव में लंबे समय से ग्रामीणों का सपना पूरा होने जा रहा है.

6th August 2020 :- बीते दिन अयोध्या (Ayodhya) में राम मंदिर (Ram Mandir) निर्माण के लिए भूमि पूजन हुआ, जिसमें प्रधानमंभत्री ने मंदिर की आधारशिला रखी. भूमिपूजन कार्यक्रम पर दुनिया भर की नजर थी.

5th August 2020 :-रामनगरी अयोध्या (Ayodhya) में अब मंदिर-मस्जिद विवाद समाप्त हो गया है. राम जन्मभूमि मंदिर में भूमि पूजन हो चुका है. दूसरी तरफ़ मस्जिद (Mosque) निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन का मालिकाना हक सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को दे दिया गया है. वक्फ बोर्ड को मस्ज़िद के लिए ज़मीन दी गई है. अयोध्या से लगभग 30 किलोमीटर दूर रौनाही में मस्ज़िद के लिए ज़मीन दी गई है. यहां मस्जिद के अलावा अस्पताल और शोध केंद्र (Hospital and Research center) का भी निर्माण किया जाएगा.

When did the dispute over Ram Janmabhoomi start and why did it take so long for a resolution?

The verdict is out. A five-judge Bench of the Supreme Court has allowed the construction of a temple in the Babri Masjid-Ram Janmabhoomi site in Ayodhya, while ordering the grant of a five-acre plot to the U.P. Central Sunni Wakf Board for the construction of a mosque. Behind this judgment is a 70-year-long litigation, which, in turn, was foreshadowed by a legal dispute, albeit settled quickly, in the 19th century. The legal battle over the possession of a 2.77-acre piece of land is now over.

Here is a backgrounder on the suits, issues and developments that led up to the Allahabad High Court verdict of 2010.

This judgment by a Full Bench of the Allahabad High Court had ordered a three-way partition of the disputed area among the deity, Ram Lalla and his ‘janmasthan’, the Nirmohi Akhara, an old order of Hindu saints that was maintaining a part of the area outside the now-demolished Masjid, and the Muslim parties. However, the Supreme Court on Saturday dismissed the remedy fashioned by the High Court as one that “defied logic”.

Sources :- Thehindu

पांच सदी पुराना है अयोध्या विवाद, जानिए कब-कब क्या-क्या हुआ?

अयोध्या का विवाद पांच सदियों से चला आ रहा है. आजादी के बाद से अब तक इस विवाद ने देश की राजनीति को प्रभावित किया है. आइए…जानते हैं कि कैसे पिछली पांच सदियों में अयोध्या का कालचक्र घूमा…

अयोध्या का विवाद पांच सदियों से चला आ रहा है. तब से जब से माना जाता है कि बाबर ने मंदिर तुड़वाकर मस्जिद का निर्माण कराया. आजादी के बाद से अब तक इस विवाद ने देश की राजनीति को प्रभावित किया है. इसकी वजह से हिंसा हुई. लोग मारे गए. जांच आयोग बनी. आरोपी तय हुए. देश की सबसे बड़ी अदालत में अब यह विवाद खत्म होने के कगार पर है. जल्द ही इस मसले पर फैसला आने की उम्मीद है.

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1528-29: कहते हैं बाबर ने मंदिर तोड़ कर मस्जिद बनवाया

अयोध्या में एक ऐसे स्थल पर एक मस्जिद बनवाया गया, जिसे हिंदू अपने आराध्य देव भगवान राम का जन्म स्थान मानते हैं. कहा जाता है कि मुगल राजा बाबर के सेनापति मीर बाकी ने यहां मस्जिद बनवाई थी, जिसे बाबरी मस्जिद के नाम से जाना जाता था. बाबर 1526 में भारत आया. 1528 तक उसका साम्राज्य अवध (वर्तमान अयोध्या) तक पहुंच गया. इसके बाद करीब तीन सदियों तक के इतिहास की जानकरी किसी भी ओपन सोर्स पर मौजूद नहीं है.

1853: …जब पहली बार अयोध्या में दंगे हुए थे

कहा जाता है कि अयोध्या में इस मुद्दे को लेकर पहला हिंदू-मुस्लिम हिंसा की पहली घटना 1853 में हुई थी. जब निर्मोही अखाड़ा ने ढांचे पर दावा करते हुए कहा कि जिस स्थल पर मस्जिद खड़ा है. वहां एक मंदिर हुआ करता था. जिसे बाबर के शासनकाल में नष्ट किया गया. अगले 2 सालों तक इस मुद्दे को लेकर अवध में हिंसा भड़कती रही. फैजाबाद जिला गजट 1905 के अनुसार 1855 तक, हिंदू और मुसलमान दोनों एक ही इमारत में पूजा या इबादत करते रहे.

1859: आजादी के पहले आंदोलन के बाद ब्रिटिश शासकों ने परिसर को बांट दिया

लेकिन 1857 में आजादी के पहले आंदोलन के चलते माहौल थोड़ा ठंडा पड़ गया. 1859 में ब्रिटिश शासकों ने मस्जिद के सामने एक दीवार बना दी गई. परिसर के भीतरी हिस्से में मुसलमानों को और बाहरी हिस्से में हिंदुओं को प्रार्थना करने की अनुमति दी गई.

1885: पहली बार जिला अदालत में पहुंचा यह विवादित मामला

मंदिर-मस्जिद विवाद ने कुछ सालों में इतना गंभीर और भयावह हो गया कि मामला पहली बार अदालत में गया. हिंदू साधु महंत रघुबर दास ने फैजाबाद कोर्ट में बाबरी मस्जिद परिसर में राम मंदिर बनवाने की इजाजत मांगी, हालांकि अदालत ने ये अपील ठुकरा दी. इसके बाद से मामला गहराता गया और सिलसिलेवार तारीखों का जिक्र मिलता है.

1934: दंगों में क्षतिग्रस्त हुई थी मस्जिद की दीवार और गुंबद

इस साल फिर सांप्रदायिक दंगे हुए. इन दंगों में मस्जिद के चारों तरफ की दीवार और गुंबदों को नुकसान पहुंचा. ब्रिटिश सरकार ने इसका पुनर्निर्माण कराया.

1949: जब हिंदुओं ने कथित तौर पर मूर्ति स्थापित की, सरकार ने लगवाया ताला

भगवान राम की मूर्ति मस्जिद में पाई गई. कहा जाता है कि मस्जिद में भगवान राम की मूर्ति हिंदुओं ने रखवाई. मुसलमानों ने इस पर विरोध व्यक्त किया और मस्जिद में नमाज पढ़ना बंद कर दिया. फिर दोनों पक्षों ने लोगों ने अदालत में मुकदमा दायर कर दिया. इसके बाद सरकार ने इस स्थल को विवादित घोषित कर ताला लगवा दिया.

1950: अदालत से भगवान राम की पूजा की इजाजत मांगी गई

गोपाल सिंह विशारद ने फैजाबाद अदालत में अपील दायर कर भगवान राम की पूजा कि इजाजत मांगी. महंत रामचंद्र दास ने मस्जिद में हिंदुओं द्वारा पूजा जारी रखने के लिए याचिका लगाई. इसी दौरान मस्जिद को ‘ढांचा’ के रूप में संबोधित किया गया.

1959-61: दोनों पक्षों ने विवादित स्थल के हक के लिए मुकदमा किया

1959 में निर्मोही अखाड़ा ने विवादित स्थल के हस्तांतरण के लिए मुकदमा किया. वहीं, मुसलमानों की तरफ से उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने भई बाबरी मस्जिद पर मालिकाना हक के लिए मुकदमा कर दिया.

1984: रामजन्मभूमि मुक्ति समिति का गठन किया गया

विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व में हिंदुओं ने भगवान राम के जन्मस्थल को मुक्त करने और वहां राम मंदिर बनाने के लिए एक समिति का गठन किया. उसी समय गोरखपुर को गोरखनाथ धाम के महंथ अवैद्यनाथ ने राम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति बनाई. अवैद्यनाथ ने अपने शिष्यों और लोगों से कहा था कि उसी पार्टी को वोट देना जो हिंदुओं के पवित्र स्थानों को मुक्त कराए. बाद में इस अभियान का नेतृत्व भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने संभाल लिया.

फरवरी 1986: ताला खोलने का आदेश हुआ, बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी बनी

जिला मजिस्ट्रेट ने हिंदुओं को प्रार्थना करने के लिए विवादित स्थल के दरवाजे से ताला खोलने का आदेश दिया. मुसलमानों ने इसके विरोध में बाबरी मस्जिद संघर्ष समिति/बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी बनाई.

जून 1989: विश्व हिंदू परिषद ने राम मंदिर का शिलान्यास किया

भारतीय जनता पार्टी ने इस मामले में विश्व हिंदू परिषद को औपचारिक समर्थन दिया. वीएचपी नेता देवकीनंदन अग्रवाल ने रामलला की तरफ से मंदिर के दावे का मुकदमा किया. नवंबर में मस्जिद से थोड़ी दूर पर राम मंदिर का शिलान्यास किया गया.

25 सितंबर 1990: आडवाणी की रथ यात्रा बिहार में रोकी गई, गिरफ्तार हुए

भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली ताकि हिंदुओं को इस महत्वपूर्ण मु्द्दे से अवगत कराया जा सके. हजारों कार सेवक अयोध्या में जमा हुए. इसके नतीजे में गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में दंगे भड़क गए. ढेरों इलाके कर्फ्यू की चपेट में आ गए. 23 अक्टूबर को बिहार में लालू यादव ने आडवाणी की रथ यात्रा रुकवा कर उन्हें गिरफ्तार करवा लिया. लेकिन मंदिर निर्माण के लिए देशभर से लाखों ईंटे अयोध्या भेजी गईं. इसके बाद भाजपा ने तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह की सरकार से समर्थन वापस ले लिया.

30 अक्टूबर 1990: अयोध्या में पहली बार कारसेवा हुई और गोलीकांड भी

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के लिए पहली बार कारसेवा हुई थी. कारसेवकों ने मस्जिद पर चढ़कर झंडा फहराया था. इसके बाद पुलिस की गोलीबारी में पांच कारसेवकों की मौत हो गई थी. गोली चलाने का आदेश मुलायम सिंह यादव की सरकार ने दी थी. तत्कालीन प्रधानमंत्री ने विवाद सुलझाने का प्रयास भी किया लेकिन सफलता नहीं मिली.

जून 1991: उत्तर प्रदेश में चुनाव हुए, सरकार भाजपा की बन गई

उत्तर प्रदेश में चुनाव हुए. मुलायम सिंह यादव की सपा सरकार हार गई. उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन गई.

6 दिसंबर 1992: बाबरी मस्जिद ढहा दिया गया, देश में दंगे शुरू

30-31 अक्टूबर 1992 को धर्मसंसद में कारसेवा की घोषणा की गई. नवंबर में यूपी के सीएम कल्याण सिंह ने अदालत में मस्जिद की हिफाजत करने का हलफनामा दिया. ये विवाद में ऐतिहासिक दिन के तौर पर याद रखा जाता है, इस रोज हजारों की संख्या में कारसेवकों ने अयोध्या पहुंचकर बाबरी मस्जिद ढहा दिया. अस्थाई राम मंदिर बना दिया गया. इसके बाद ही पूरे देश में चारों ओर सांप्रदायिक दंगे होने लगे. इसमें करीब 2000 लोगों के मारे गए.

16 दिसंबर 1992: मस्जिद ढहाने की जांच के लिए लिब्रहान आयोग बना

मस्जिद को ढहाने के मामले को लेकर लिब्रहान आयोग बनाया गया. जज एमएस लिब्रहान के नेतृत्व में जांच शुरू की गई.

1994: इलाहाबाद हाईकोर्ट में केस शुरू हुआ

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में बाबरी मस्जिद विध्वंस से संबंधित केस चलना शुरू हुआ.

सितंबर 1997: मस्जिद ढहाने को लेकर 49 लोग दोषी करार दिए गए

बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने इस मामले में 49 लोगों को दोषी करार दिया. इसमें भारतीय जनता पार्टी के कुछ प्रमुख नेताओं के नाम भी थे.

2001: विश्व हिंदू परिषद ने राम मंदिर बनाने की तारीख तय की

बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी पर तनाव बढ़ गया. विश्व हिंदू परिषद ने कहा कि मार्च 2002 को अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कराया जाएगा.

जनवरी-फरवरी 2002: वाजपेयी ने मामला सुलझाने के लिए अधिकारी नियुक्त किया, गोधरा कांड हुआ

अयोध्या विवाद सुलझाने के लिए प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने अयोध्या समिति का गठन किया. वरिष्ठ अधिकारी शत्रुघ्न सिंह को हिंदू और मुसलमान नेताओं के साथ बातचीत के लिए नियुक्त किया गया. भाजपा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अपने घोषणापत्र में राम मंदिर निर्माण के मुद्दे को शामिल करने से इनकार कर दिया. विश्व हिंदू परिषद ने 15 मार्च से राम मंदिर निर्माण कार्य शुरू करने की घोषणा कर दी. सैकड़ों हिंदू कार्यकर्ता अयोध्या में इकठ्ठा हुए. फरवरी अयोध्या से लौट रहे हिंदू कार्यकर्ता जिस रेलगाड़ी में यात्रा कर रहे थे उस पर गोधरा में हुए हमले में 58 कार्यकर्ता मारे गए.

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13 मार्च 2002: सुप्रीम कोर्ट ने कहा अयोध्या में यथास्थिति बरकरार रखें

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अयोध्या में यथास्थिति बरकरार रखी जाएगी. किसी को भी सरकार द्वारा अधिग्रहित जमीन पर शिलापूजन की अनुमति नहीं होगी. केंद्र सरकार ने कहा कि अदालत के फैसले का पालन किया जाएगा.

15 मार्च 2002: सरकार को सौंपी गई शिलाएं

विश्व हिंदू परिषद और केंद्र सरकार के बीच इस बात पर समझौता हुआ कि विहिप के नेता सरकार को मंदिर परिसर से बाहर शिलाएं सौंपेंगे. रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत परमहंस रामचंद्र दास और विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक सिंघल के नेतृत्व में लगभग 800 कार्यकर्ताओं ने सरकारी अधिकारी को अखाड़े में शिलाएं सौंपीं.

अप्रैल 2002: हाईकोर्ट में मालिकाना हक को लेकर सुनवाई शुरू की

हाईकोर्ट के तीन जजों की पीठ ने अयोध्या के विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर सुनवाई आरंभ की.

मार्च-अगस्त 2003: पुरातत्व विभाग ने विवादित स्थल के नीचे खुदाई की

हाई कोर्ट के निर्देश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने अयोध्या में खुदाई की. पुरातत्वविदों ने कहा कि मस्जिद के नीचे मंदिर से मिलते-जुलते अवशेष के प्रमाण मिले हैं. हालांकि इसे लेकर भी अलग-अलग मत थे. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से विवादित स्थल पर पूजापाठ की अनुमति देने का अनुरोध किया, जिसे ठुकरा दिया गया.

मई 2003: सीबीआई ने आडवाणी समेत 8 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया

सीबीआई ने 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी सहित आठ लोगों के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दाखिल किए.

जून 2003: शंकराचार्य ने मध्यस्थता का प्रयास किया, पर विफल

कांची पीठ के शंकराचार्य ने जयेंद्र सरस्वती ने मामला सुलझाने के लिए मध्यस्थता की. उन्होंने उम्मीद जताई थी कि एक महीने में इस मामले का हल निकाल लिया जाएगा. लेकिन ऐसा कुछ हो नहीं पाया.

अगस्त 2003: मंदिर निर्माण के लिए विशेष विधेयक लाने का प्रस्ताव ठुकराया

भाजपा नेता और उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने विहिप के इस अनुरोध को ठुकराया कि राम मंदिर बनाने के लिए विशेष विधेयक लाया जाए.

अप्रैल-जुलाई 2004: आडवाणी ने अस्थाई मंदिर में पूजा की

आडवाणी ने अयोध्या में अस्थाई राम मंदिर में पूजा की और कहा कि मंदिर का निर्माण जरूर किया जाएगा. जुलाई में शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने सुझाव दिया कि विवादित स्थल पर मंगल पांडे के नाम पर कोई राष्ट्रीय स्मारक बना दिया जाए.

जनवरी-जुलाई 2005: आडवाणी अदालत में तलब, अयोध्या में आतंकी हमला

लालकृष्ण आडवाणी को अयोध्या में छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस में उनकी कथित भूमिका के मामले में अदालत में तलब किया गया. इसी साल जुलाई में अयोध्या के राम जन्मभूमि परिसर में आतंकी हमले हुए, जिसमें पांचों आतंकियों सहित छह लोग मारे गए. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने के दौरान भड़काऊ भाषण देने के मामने में आडवाणी को तलब किया. इससे पहले उन्हें बरी कर दिया गया था. 28 जुलाई को आडवाणी इसी मामले में रायबरेली की एक अदालत में पेश हुए. कोर्ट ने उनके खिलाफ आरोप तय किए.

4 अगस्त 2005: चार लोग न्यायिक हिरासत में भेजा

फैजाबाद की अदालत ने अयोध्या के विवादित परिसर के पास हुए हमले में कथित रूप से शामिल चार लोगों को न्यायिक हिरासत में भेजा.

20 अप्रैल 2006: सरकार ने लिब्रहान आयोग से कहा- यह मिलीभगत थी

कांग्रेस के नेतृत्ववाली यूपीए सरकार ने लिब्रहान आयोग के समक्ष लिखित बयान में आरोप लगाया कि बाबरी मस्जिद को ढहाया जाना सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा था. इसमें भाजपा, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, बजरंग दल और शिवसेना की मिलीभगत थी.

जुलाई 2006: बुलेटप्रूफ कांच का घेरा बनाने का प्रस्ताव खारिज

सरकार ने अयोध्या में विवादित स्थल पर बने अस्थाई राम मंदिर की सुरक्षा के लिए बुलेटप्रूफ कांच का घेरा बनाए जाने का प्रस्ताव किया. इस प्रस्ताव का मुस्लिम समुदाय ने विरोध किया और कहा कि यह अदालत के उस आदेश के ख़िलाफ़ है जिसमें यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए थे.

19 मार्च 2007: राहुल गांधी बोले- नेहरू-गांधी परिवार का पीएम होता तो मस्जिद न गिरती

कांग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने चुनावी दौरे के बीच कहा कि अगर नेहरू-गांधी परिवार का कोई सदस्य प्रधानमंत्री होता तो बाबरी मस्जिद न गिरी होती. उनके इस बयान पर पूरे देश की राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया हुई थी.

30 जून-नवंबर 2009: लिब्रहान आयोग ने रिपोर्ट पीएम मनमोहन सिंह को सौंपी

बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले की जांच के लिए गठित लिब्रहान आयोग ने 17 वर्षों के बाद अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंपी. इसी साल, 7 जुलाई को उत्तर प्रदेश सरकार ने एक हलफनामे में स्वीकार किया कि अयोध्या विवाद से जुड़ी 23 जरूरी फाइलें सचिवालय से गायब हो गई हैं. 24 नवंबर को लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में पेश. आयोग ने अटल बिहारी वाजपेयी और मीडिया को दोषी ठहराया. नरसिंहराव को क्लीन चिट दी.

20 मई 2010: हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका खारिज हो गई

बाबरी विध्वंस के मामले में लालकृष्ण आडवाणी और अन्य नेताओं के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने को लेकर दायर पुनरीक्षण याचिका हाईकोर्ट में खारिज हो गई.

26 जुलाई 2010: अयोध्या विवाद पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हुई.

सितंबर 2010: 8 सितंबर को हाईकोर्ट ने अयोध्या विवाद पर 24 सितंबर को फैसला सुनाने की घोषणा की. 28 सितंबर को हाईकोर्ट ने फैसला टालने की अर्जी खारिज की.

30 सितंबर 2010: कोर्ट का फैसला- तीन हिस्सों में बांट दिया गया विवादित स्थल

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया. इसके तहत विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटा दिया गया. इसमें एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े को मिला.

9 मई 2011: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाई. हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ 14 अपील दाखिल हुई.

मार्च-अप्रैल 2017: 21 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने आपसी सहमति से विवाद सुलझाने की बात कही. सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती सहित बीजेपी और आरएसएस के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक केस चलाने का आदेश दिया.

नवंबर-दिसंबर 2017: रिजवी बोले- विवादित स्थल पर राम मंदिर बने

8 नवंबर को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने बड़ा बयान दिया था. रिजवी ने कहा कि अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर बनना चाहिए, वहां से दूर हटके मस्जिद का निर्माण किया जाए. 16 नवंबर को आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर ने मामले को सुलझाने के लिए मध्यस्थता करने की कोशिश की, उन्होंने कई पक्षों से मुलाकात की. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने 8 फरवरी तक सभी दस्तावेजों को पूरा करने के लिए कहा.

फरवरी-जुलाई 2018: नियमित सुनवाई की अपील खारिज

8 फरवरी को सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट से मामले पर नियमित सुनवाई करने की अपील की. लेकिन पीठ ने उनकी अपील खारिज कर दी. राजीव धवन ने कोर्ट से मांग की कि साल 1994 के इस्माइल फारूकी बनाम भारतीय संघ के फैसले को पुर्नविचार के लिए बड़ी बेंच के पास भेजा जाए. सुप्रीम कोर्ट ने राजीव धवन की अपील पर फैसला सुरक्षित रखा.

27 सितंबर 2018: ‘मस्जिद इस्लाम का अनिवार्य अंग नहीं’ मामला बड़ी बेंच को भेजने से इनकार

कोर्ट ने इस्माइल फारूकी बनाम भारतीय संघ के 1994 का फैसला, जिसमें कहा गया था कि ‘मस्जिद इस्लाम का अनिवार्य अंग नहीं’ को बड़ी बेंच को भेजने से इनकार करते हुए कहा था कि अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में दीवानी वाद का निर्णय साक्ष्यों के आधार पर होगा और पूर्व का फैसला सिर्फ भूमि आधिग्रहण के केस में ही लागू होगा.

29 अक्टूबर 2018: सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जल्द सुनाई पर इनकार करते हुए केस जनवरी 2019 तक के लिए टाल दिया.

24 नवंबर 2018: शिवसेना का अयोध्या में कार्यक्रम हुआ

अयोध्या में शिवसेना ने कार्यक्रम किया. इस सभा के दौरान उद्धव ठाकरे ने अपने भाषण में बीजेपी को जमकर खरी-खोटी सुनाई. उन्होंने मोदी सरकार की तुलना कुंभकरण से करते हुए कहा कि मैं यहां कोई लड़ाई लड़ने नहीं आया हूं. आज तो मैं सिर्फ सोए हुए कुंभकरण को जगाने आया हूं. कुंभकरण 6 महीने सोते थे, आज के कुंभकरण पिछले 4 सालों से सोए हुए हैं. मैं उनको जगाने आया हूं. जो वादा करते हैं, जो वचन देते हैं, उसे निभाना चाहिए. चलो सब लोग मिलकर मंदिर बनाते हैं.

25 नवंबर 2018: विश्व हिंदू परिषद की अगुवाई में धर्म सभा हुई

अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद की अगुवाई में धर्म सभा हुई. धर्म सभा में हिंदू संत रामभद्राचार्य ने कहा कि बहुत जल्द ही भव्य राम मंदिर का निर्माण करना होगा. बीजेपी पर आरोप लगाया कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की वजह से तारीख का ऐलान नहीं किया जा रहा है. इसके साथ ही विश्व हिंदू परिषद का कहना था कि अब करो या मरो का वक्त है, देश का बहुसंख्यक समाज अब इस मामले का हल होते हुए देखना चाहता है.

1 जनवरी 2019: पीएम मोदी ने कहा- फैसला कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद

पीएम नरेंद्र मोदी ने 2019 के अपने पहले इंटरव्यू में कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए अध्यादेश पर फैसला कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जा सकता है. राम मंदिर पर अध्यादेश लाने के बारे पीएम ने कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है, और संभवत: अपने अंतिम चरण में है. उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने दीजिए, इसके बाद जो भी सरकार की जिम्मेदारी होगी उसे पूरा किया जाएगा.

8 मार्च 2019: सुप्रीम कोर्ट ने मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा. पैनल को 8 सप्ताह के अंदर कार्यवाही खत्म करने को कहा.

अगस्त 2019: मध्यस्थता पैनल समाधान निकालने में विफल रहा

1 अगस्त को मध्यस्थता पैनल ने रिपोर्ट प्रस्तुत की. 2 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता पैनल मामले का समाधान निकालने में विफल रहा. 6 अगस्त से सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की रोजाना सुनवाई शुरू हुई.

16 अक्टूबर 2019: सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले में सुनवाई पूरी. फैसला सुरक्षित रखा.

Sources :- Aajtak

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